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Sunday, August 20, 2017

खतौली रेल हादसा ( हरिद्वार - पुरी एक्सप्रेस)

#हरिद्वार #पुरी #उत्कल #रेल #खतौली #मुजफ्फरनगर #हादसा #रेलवे #लापरवाही #गैरजिम्मेदाराना #जिंदगी #मौत #जिम्मेदार #कौन

कल (शनिवार दिनांक १९अगस्त २०१७) शाम हुए उत्कल एक्सप्रेस हादसे को देख कर अचानक बड़ा झटका, मैं खुद उस समय ड्यूटी पर था जैसा कि सबको पता है में खुद दिल्ली मेट्रो में ट्रेन चालक हूँ, रेलवे से जुड़ा होने के कारण इस क्षेत्र की खामियां भी अच्छे से जानता हूँ, जैसे ही मैं अपनी ट्रेन चलाकर वापस रेस्ट रूम आया तो टीवी पर ब्रेकिंग न्यूज में रेल हादसे की खबर थी, हादसे हमारे क्षेत्र के पास ही हुआ था इसलिए और भी ज्यादा चिंताजनक बात थी

मीडियाई पड़ताल के आधार पर इसमे दो बात बिल्कुल साफ है इस बार चालक की कोई गलती नही है, दूसरी बात ये हादसा रेलवे कर्मचारियों के गैर जिम्मेदाराना व्यवहार का नतीजा है, अभी तो जो जानकारी निजी सूत्रों, मीडिया और वहाँ के निवासियों से प्राप्त हुई है उसके हिसाब से  ऊपरी तौर पर इस हादसे के लिए पूरी तरह से रेलवे का पी वे विभाग जिम्मेदार है जोकि ट्रैक की मरम्मत आदि का काम देखता है,

सच को नकारा नही जा सकता, रेलवे कर्मचारी या कहे कोई भी सरकारी कर्मचारी (कुछ गिने चुने विभागों को छोड़कर) अपना काम जिम्मेदारी से नही करते, दैवीय आपदा और मानव भूल को अलग कर दे तो भी रेल कर्मचारियों की लापरवाही से पता नही  कितने हादसे होते है, कई बार जान माल की हानि होती है कई बार नही भी होती,  कई बार मीडिया में जगह मिलती है कई बार नही भी मिलती, इस हादसे के लिए जिम्मेदार वहां का पी वे स्टाफ है, मेरी खुद वहां के एक साथी स्टाफ से बात हुई है जो ये बता रहा है की वहां आजकल लापरवाही चरम पर थी, वजह थी नये JE से लोगो को ना संभाल पाना, ना ही उसे काम की जानकारी थी ना ही लोगो  पर कोई कंट्रोल, हादसे के वक़्त भी ये ही हुआ, दोपहर में बिना स्टेशन इंचार्ज की बताए हुए बिना कोई ब्लॉक लिए टीम की लेकर ट्रेक पर पहुँच गया, बाकी गैंगमैन स्टाफ जोकि पुराना था वो किसी की नही सुनते थे बीच मे काम छोड़ कर भाग गए, पटरी का एक टुकड़ा बदलना था, जिसे काट कर बदल चुके थे लेकिन वेल्ड करना बाकी था, विभाग में किसी को इसकी कोई औपचारिक जानकारी नही थी भले ही उसने मौखिक तौर पर बताया हुआ हो, बारिस, धूप, थकान या कामचोरी वजह जो भी रही हो लेकिन सच यहीं है कि गैंगमैन स्टाफ और JE की गलती की वजह से ही ये हादसा हुआ है, इसी से मिलती जुलती हालात बताने वाला एक ऑडियो भी वायरल हो चुका है, जिसमे लोहार आदि गैंगमैन स्टाफ और JE की कमी बता रहा है वहाँ का फाटक पर तैनात गैंगमैन स्टाफ, जो साफ साफ कह रहा है कि ना कोई पेट्रोलिंग करता है ना मरम्मत,

मेरे कई नजदीकी दोस्त और परिवार जन रेलवे में कार्यरत है, मैं खुद भी मेट्रो रेल में हूँ इसलिए रेलवे की हकीकत भलीभांति जानता हूँ, इसमे कोई शक नही  की गैंगमैन सबसे मेहनती आदमी है रेलवे का, उसके बाद ड्राइवर, लेकिन सभी को एक साथ नही रख सकते कि बार विभिन्न कारणों के लापरवाही होती है और कुछ समय बाद वो आदत या वर्क कल्चर बन जाती है, खतौली में भी वहीं हुआ वहाँ नया जेई अपने सबऑर्डिनेट को कंट्रोल नही कर पाया और लापरवाही शुरू हुई, शुरू में कोई हादसा नही हुआ तो ये ही वर्क कल्चर बन गया वहाँ का, लेकिन बिना मरम्मत के कब तक चलता

बाकि यदि जाँच निष्पक्ष हुई तो सच सबके सामने आ ही जाना है नही तो सरकारी जाँच में किस तरह लीपापोती की जाती है उस से भी हम सभी भली भांति वाकिफ है,

पीड़ित परिवारों के लिए संवेदना और ईश्वर से प्रार्थना है इस मुश्किल समय मे उन्हें हिम्मत दे और दोषियों को सजा, ईश्वर ही न्याय कर सकता है बाकी देश के कानून और न्यायप्रणाली से मुझे निजी तौर पर कोई खास उम्मीद नही है

Thursday, August 10, 2017

चोटी और डोकलाम

अभी अभी कहीं पढ़ा कि चीन कह रहा है अभी भी भारत के ५३ सैनिक और एक बुल्डोजर डोकलाम में चीन की सीमा में घुसे हुए है,

दरसअल जब से भारत चीन का डोकलाम में ये सीमा विवाद मीडिया में आया है तभी से सोच रहा हूँ आखिर ये माजरा क्या है, फिर मेरे पांचवी पास से तेज दिमाग ने जोड़ घटा गुणा भाग कर के ये हिसाब लगाया है कि ये सब मिलकर हमे पागल बना रहे है, हम भी डिप्लोमची है कोई ऐसे वैसे नही तो जो बात इस हिसाब लगाने से सामने आई है वो ये है कि हमारे सडजी ने अपने ही कुछ असम मणिपुर के भाइयो और कुछ नेपाली साबजी को पकड़ कर फोटो शूट कराया था इस बार दिल्ली युद्ध के लिए तैयार है, अब कुछ आपियो ने जोश जोश में वो फोटो फेसबुक ट्विटर पर अपनी दहाड़ी पूरी करने के मकसद से पोस्ट कर दिया,

यहां अमित शाह के चेले कुछ भक्त फिराक में बैठे थे कि कब सडजी कुछ बोले हम सडजी को ट्रोल करे, वैसे भी जब से कपिल मिश्रा ने रायते में फेवीक्विक मिलाया है तब से सोशल मीडिया में कच्चे माल की भारी कमी बताई जा रही है, इधर मोदी नाम पर बने के एक फर्जी एकाउंट ने फोटोशॉप करके सड़ जी को सेना की वर्दी पहना कर फोटो ट्वीट कर दी, मजे मजे में भक्तों की टोली ने फोटो वायरल कर दी,

वहाँ शी जिनपिंग फोटो देख कर सदमे में आ गया कि ये दिल्ली किससे युद्ध को तैयार है और ये इसने हमारे चीनी भाइयो को क्यो कब्जे में ले लिया, वहाँ चीन ने भी अपनी तैयारिया शुरू कर दी वे भी चुपचाप डोकलाम के रास्ते भारत मे घुसने की तैयारी कर रहे थे अपने भाइयों को बचाने के लिए, वहाँ भारत की सेना पहले ही तैयार खड़ी मिली अपने ट्रक लेकर, अब जिस खेत मे चीन और भारत के सैनिकों की मुलाकात हुई उसका पता ना चीन के सैनिकों को है ना भारत के सैनिको को की ये है किसका, जिसका वो खेत है उसे कोई पूछ नही रहा दोनो अपना बता रहे है,

जब से वो एक सैनिक ने दाल रोटी वाली वीडियो बना कर डाली तब से हर कोई वीडियो बनाने में लगा हुआ है, अपने सैनिकों ने बन्दूक की जगह अपने मोबाइल निकाल कर वीडियो बनानी शुरू की और फेसबुक वाट्सएप्प पर घूमने के लिए छोड़ दी,

अब यहाँ ठहरे ५६ इंची छाती वाले बोले चीन वाले कुल ५६ इंच के नही है बोले क्यो भाइयो है कि नही...
भीड़ का क्या है भीड़ ने क्या सुना क्या समझा ये तो वो ही जाने लेकिन भीड़ की आवाज से साहब समझ गए १०० करोड़ मेरे साथ है बाकी २५ करोड़ अभी डर के साये में है और हाँ जो ३-४ करोड़ बचे वे कांग्रेसी है उनकी अभी कहीं कोई गिनती नही है, साहब ने भी सेना को फरमान जारी कर दिया कि अब पीछे नही हटना है और राजनाथ को बोला कि एक कड़ी निंदा वाला ट्वीट टाइप करके ड्राफ्ट में रखो यदि कुछ गड़बड़ हो तो तुरंत कड़ी निंदा कर देना,

इधर अपने सडजी परेशान की मैं तो डेंगू मछरों से युद्ध करने निकला था ये अनपढ़ आपिये मेरा जनाजा ही निकाल कर मानेंगे, खैर डैमेज कंट्रोल के लिए सडजी ने आनन फानन में नई रणनीति बनाई कि कैसे भी करके पब्लिक का ध्यान उस मुद्दे से हटाया जाए कहीं चीन वाले सच मे मुझे ना उड़ा दे, इस से पहले की सडजी चप्पल या चांटा लगवाते हमारे पप्पू भी साहब ने पत्थर फेंकवा लिया, सड़ जी ने मन ही मन पप्पू को गाली देते हुए आपियो की आपात बैठक बुलाई, पिंचर वालो का काम तो जोरो शोरो से चल रहा है लेकिन आजकल बाल काटने के धंधे में लगे लोग बेरोजगार है जिसे देखो दो मीटर की दाढ़ी बढ़ाए देवदास बना घूम रहा, सड़ जी के आई आई टी वाले दिमाग में तुरंत बेरोजगार नाईयो को रोजगार देने का खयाल आया और उन्हें एनसीआर में चोटी काटने का ठेका दे दिया,

अब हमारी अबला माताओ बहनों ने भी योजना का पूरा लाभ उठाया जिन्हें कोई बाल छोटे नही करने दे रहा थ खुद ही उड़ा कर चोटी गैंग के नाम लगाना शुरू कर दिया,  इधर भारत की मीडिया भूखी बैठी थी कि कब से कोई ब्रेकिंग न्यूज़ नही आई , इस ब्रेकिंग न्यूज़ के आते ही मीडिया चीन और देशभक्ति को भूल चोटी गैंग का पर्दाफाश करने में जुट गई,

वहाँ हमारे जिनपिंग भाईसाहब परेशान है कि यहां मैं रोज युद्ध की धमकी दे रहा हूँ उधर कोई सीरियस नही ले रहा, आज थक हारकर हाथ जोड़कर विनती की है कि भाई साहब यदि चोटी गैंग से फुरसत मिल गयी हो तो ये भी देख लो अब तक मैं पूरे २४१५७८ बार युद्ध की धमकी दे चुका हूँ अब तो सीरियस हो जाओ

नोट: ये केवल एक हास्य व्यंग्य है कोई अपनी राजनैतिक भावना बेन को आहत ना करे,

आपका पगला पंडित
अतुल शर्मा गुड्डू
रासना  वाला

Wednesday, August 9, 2017

काकोरी कांड या भारत छोड़ो आंदोलन

#काकोरीकाण्ड
अंग्रेजी सीनाजोरी को, उत्तर था वो जी दारी का...
कुछ मतवाले जांबाजों ने, था काण्ड किया काकोरी का...
#वंदेमातरम...

ये कहानी उनके लिए जिन्हें लगता है आजादी किसी गाँधी या नेहरू ने दिलाई थी

एक गाँव में एक बहुत पुराना विराट वृक्ष था उसमे तरह तरह के विषैले सर्प रहते थे जो वहां से निकलने वाले पथिकों को काट लिया करते थे गाँव के लोग परेशान रहने लग गए क्योंकि उस गाँव का मुख्य मार्ग वही था
फिर एक दिन पंचायत में तय हुआ की इस वृक्ष को काट दिया जाए और फिर शुरू हुआ गाँव को उस वृक्ष से आज़ाद कराने का आंदोलन।
उस वृक्ष को काटने जो भी व्यक्ति जाता कुल्हाड़ी से एक दो वार करता तब तक उसे सर्प काट लेता और वो मर जाता
लेकिन गाँव वालों ने हिम्मत नही हारी बीसों साल सतत प्रयास होता रहा कई लोग मौत की नींद सोते रहे परंतु कुल्हाड़ियों के निरंतर वार से वह वृक्ष इतना कमजोर हो गया की बस आज गिरा या कल गिरा लेकिन गाँव वाले इस बात से अनभिज्ञ थे क्योंकि वृक्ष झाड़ियों से घिरा हुआ था

एक दिन गाँव में दो कौवे आये और उसी वृक्ष में बैठ कर जोर से काँव काँव करने लग गए चूंकि पेड़ कमजोर हो गया था जिसके कारण वह उसी समय गिर गया और गाँव के अनपढ़ भोले भाले लोग उन कौवों को भगवान का भेजा हुआ दूत समझ बैठे और पेड़ गिराने का सारा श्रेय अपनी जान देने वाले उन शहीदों को न देकर उन दोनों कौवो को देने लग गए।

इस कहानी को #गांधी #नेहरू से जोड़कर अवश्य देखें।

आने वाली पीढियां उतना ही जान पाती है जितना उन्हें बताया जाता है,  हमे दिन रात चारो तरफ गाँधी नेहरू पढ़ाए दिखाए गए तो उन्हें ही आजादी के रहनुमा समझ बैठे, जो अपना सबकुछ न्योछावर कर गए उनकी कोई बात भी नही करता क्योंकि उन्हें इतिहास के पन्नो से भी गायब कर दिया गया, पूरा दिन बीतने पर काकोरी वालो को याद करने वाले वाले गिनती के थे जिन्हें लोग संघी भाजपा वाले या भक्त कहते है बाकी सब उन आंदोलनों की बरसी मनाते रहे जो हर बार बीच मझधार में छोड़ कर रास्ते बदल गए, 

चलो मान लिया चरखे ने ही उन सारे अंग्रेजो को पटका था, 

पर हमको दे दो वो पावन रस्सी जिस पर बिस्मिल लटका था,

भलो हो गाँधी की धोती तुम्हारे लिए गहना था,

पर हमको दे दो वो फंदा जिसे भगत सिंह ने पहना था, 

चलो आजादी के महायुद्ध में सारा कार्य तुम्हारा था,

पर हमको दे दो वो गोली जिसे आजाद ने खुद को मारा था,

हम मान चुके की नेहरू ही भारत आजाद कराया था,

पर हमें सुना दो फिर वो धुन जिसे राजगुरु ने गाया था, 


सोते सोते एक गौरवमयी श्रद्धांजलि उन शहीदों के नाम जिनके नाम भी मिटा दिए गए,

#काकोरी

आपका पगला पंडित
अतुल शर्मा गुड्डू
रासना वाला