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Thursday, August 10, 2017

चोटी और डोकलाम

अभी अभी कहीं पढ़ा कि चीन कह रहा है अभी भी भारत के ५३ सैनिक और एक बुल्डोजर डोकलाम में चीन की सीमा में घुसे हुए है,

दरसअल जब से भारत चीन का डोकलाम में ये सीमा विवाद मीडिया में आया है तभी से सोच रहा हूँ आखिर ये माजरा क्या है, फिर मेरे पांचवी पास से तेज दिमाग ने जोड़ घटा गुणा भाग कर के ये हिसाब लगाया है कि ये सब मिलकर हमे पागल बना रहे है, हम भी डिप्लोमची है कोई ऐसे वैसे नही तो जो बात इस हिसाब लगाने से सामने आई है वो ये है कि हमारे सडजी ने अपने ही कुछ असम मणिपुर के भाइयो और कुछ नेपाली साबजी को पकड़ कर फोटो शूट कराया था इस बार दिल्ली युद्ध के लिए तैयार है, अब कुछ आपियो ने जोश जोश में वो फोटो फेसबुक ट्विटर पर अपनी दहाड़ी पूरी करने के मकसद से पोस्ट कर दिया,

यहां अमित शाह के चेले कुछ भक्त फिराक में बैठे थे कि कब सडजी कुछ बोले हम सडजी को ट्रोल करे, वैसे भी जब से कपिल मिश्रा ने रायते में फेवीक्विक मिलाया है तब से सोशल मीडिया में कच्चे माल की भारी कमी बताई जा रही है, इधर मोदी नाम पर बने के एक फर्जी एकाउंट ने फोटोशॉप करके सड़ जी को सेना की वर्दी पहना कर फोटो ट्वीट कर दी, मजे मजे में भक्तों की टोली ने फोटो वायरल कर दी,

वहाँ शी जिनपिंग फोटो देख कर सदमे में आ गया कि ये दिल्ली किससे युद्ध को तैयार है और ये इसने हमारे चीनी भाइयो को क्यो कब्जे में ले लिया, वहाँ चीन ने भी अपनी तैयारिया शुरू कर दी वे भी चुपचाप डोकलाम के रास्ते भारत मे घुसने की तैयारी कर रहे थे अपने भाइयों को बचाने के लिए, वहाँ भारत की सेना पहले ही तैयार खड़ी मिली अपने ट्रक लेकर, अब जिस खेत मे चीन और भारत के सैनिकों की मुलाकात हुई उसका पता ना चीन के सैनिकों को है ना भारत के सैनिको को की ये है किसका, जिसका वो खेत है उसे कोई पूछ नही रहा दोनो अपना बता रहे है,

जब से वो एक सैनिक ने दाल रोटी वाली वीडियो बना कर डाली तब से हर कोई वीडियो बनाने में लगा हुआ है, अपने सैनिकों ने बन्दूक की जगह अपने मोबाइल निकाल कर वीडियो बनानी शुरू की और फेसबुक वाट्सएप्प पर घूमने के लिए छोड़ दी,

अब यहाँ ठहरे ५६ इंची छाती वाले बोले चीन वाले कुल ५६ इंच के नही है बोले क्यो भाइयो है कि नही...
भीड़ का क्या है भीड़ ने क्या सुना क्या समझा ये तो वो ही जाने लेकिन भीड़ की आवाज से साहब समझ गए १०० करोड़ मेरे साथ है बाकी २५ करोड़ अभी डर के साये में है और हाँ जो ३-४ करोड़ बचे वे कांग्रेसी है उनकी अभी कहीं कोई गिनती नही है, साहब ने भी सेना को फरमान जारी कर दिया कि अब पीछे नही हटना है और राजनाथ को बोला कि एक कड़ी निंदा वाला ट्वीट टाइप करके ड्राफ्ट में रखो यदि कुछ गड़बड़ हो तो तुरंत कड़ी निंदा कर देना,

इधर अपने सडजी परेशान की मैं तो डेंगू मछरों से युद्ध करने निकला था ये अनपढ़ आपिये मेरा जनाजा ही निकाल कर मानेंगे, खैर डैमेज कंट्रोल के लिए सडजी ने आनन फानन में नई रणनीति बनाई कि कैसे भी करके पब्लिक का ध्यान उस मुद्दे से हटाया जाए कहीं चीन वाले सच मे मुझे ना उड़ा दे, इस से पहले की सडजी चप्पल या चांटा लगवाते हमारे पप्पू भी साहब ने पत्थर फेंकवा लिया, सड़ जी ने मन ही मन पप्पू को गाली देते हुए आपियो की आपात बैठक बुलाई, पिंचर वालो का काम तो जोरो शोरो से चल रहा है लेकिन आजकल बाल काटने के धंधे में लगे लोग बेरोजगार है जिसे देखो दो मीटर की दाढ़ी बढ़ाए देवदास बना घूम रहा, सड़ जी के आई आई टी वाले दिमाग में तुरंत बेरोजगार नाईयो को रोजगार देने का खयाल आया और उन्हें एनसीआर में चोटी काटने का ठेका दे दिया,

अब हमारी अबला माताओ बहनों ने भी योजना का पूरा लाभ उठाया जिन्हें कोई बाल छोटे नही करने दे रहा थ खुद ही उड़ा कर चोटी गैंग के नाम लगाना शुरू कर दिया,  इधर भारत की मीडिया भूखी बैठी थी कि कब से कोई ब्रेकिंग न्यूज़ नही आई , इस ब्रेकिंग न्यूज़ के आते ही मीडिया चीन और देशभक्ति को भूल चोटी गैंग का पर्दाफाश करने में जुट गई,

वहाँ हमारे जिनपिंग भाईसाहब परेशान है कि यहां मैं रोज युद्ध की धमकी दे रहा हूँ उधर कोई सीरियस नही ले रहा, आज थक हारकर हाथ जोड़कर विनती की है कि भाई साहब यदि चोटी गैंग से फुरसत मिल गयी हो तो ये भी देख लो अब तक मैं पूरे २४१५७८ बार युद्ध की धमकी दे चुका हूँ अब तो सीरियस हो जाओ

नोट: ये केवल एक हास्य व्यंग्य है कोई अपनी राजनैतिक भावना बेन को आहत ना करे,

आपका पगला पंडित
अतुल शर्मा गुड्डू
रासना  वाला

Sunday, February 12, 2017

ISI के जासूस और हम

समुदाय विशेष वाले आकर पुछते हैं कि मध्य प्रदेश में 11 ISI के जासूस पकड़े गये उसपर कुछ कहो,लिखो। दरअसल वह कहना चाहते थे जिस भाजपा को आप राष्ट्रवादी बताते हो उसके ही पार्टी के नेता के रिश्तेदार इसमें लिप्त है,इसलिये क्या आप इसके लिये भाजपा को ISI का एजेंट मानते हो?

मेरे प्यारे मित्र, आपका और आपके जैसे तमाम दोगली सोच वालों की दोगलीयत को सर्वप्रथम दंडवत प्रणाम। कल तक मोदी को शांतीदुत विरोधी और हिटलर बताने के लिये आप जिस पुलिस, ATS, NIA, Intelligence, फौज सबको मोदी के हाथों बिक गयी बताते थे आज उसके ही द्वारा पकड़े गये इन 11 लोगों के लिये आप इन संस्थाओं को शाबाशी दे रहे हैं। आप की इस मोदीविरोध में दोनों तरफ से खाना खा सकने वाली क्षमता का मैं कायल हो गया हूँ।

वैसे शाबाशी तो देनी ही होगी उस म.प्र. पुलिस को जिसे कल तक आप मुख्यमन्त्री शिवाराज सिंह की पुलिस कहते थे और उसके द्वारा भोपाल जेल से भागे गये आतंकीयों को ठोकने की वजह से उसे फेक एनकांउटर कह रहे थे। दरअसल दिक्कत यह थी कि वह भाजपा की सरकार थी और भागने वाले आपके समुदाय के थे। पर चलो आज आपने म.प्र पुलिस कि इस 11 लोगों की गिरफ्तारी पर भरोसा किया है तो यह प्रमाणित होता है कि म.प्र. पुलिस ईमानदार है, और वह एनकांउटर फेक नहीं था।

फिर मैं शाबासी दूँगा ATS को, जिसका इन्हें पकड़ने में योगदान है। वही ATS जिसे कल तक आप कल तक इशरत जहाँ का हत्यारा कहते थे, और मोदी के हाथों खेलने वाले संस्थान बताते थे। पर अब चूंकि ATS ने इन 11 लोगों को पकड़ा है और आप पुरी तरह आश्वस्त हैं कि यह 11 ISI के जासूस थे तो आप इस बात की पुष्टि करते हैं कि ATS जो करती है सही करती है। ATS ने इशरत को मारा बिलकुल सही किया। पर आप कल तक विरोध सिर्फ इसलिये करते रहे कारण इशरत आपके समुदाय की थी।

फिर शाबाशी देते हैं NIA तथा अन्य सुरक्षा एजेंसीयों का भी जिसे कल तक आप हर गिरफ्तारी के बाद समुदाय विशेष विरोधी बताते थे। और इनके द्वारा की गयी हर गिरफ्तारी में गिरफ्तार लोगों को मासुम बताते थे, कारण वह आपके समुदाय के होते थे। पर खैर आज आप जब NIA कि इस 11 गिरफ्तारीयों का स्वागत कर रहे हैं तो मैं मान लेता हूँ कि पहले  की गयी सभी गिरफ्तारीयों को भी आप सही मानते हो।

और अंत में हो सकता है फौज का भी योगदान रहा हो,वही फौज जिसे कल तक आप हत्यारा कहते थे कश्मीरी आतंकीयों को मारने पर, वही फौज जिसके द्वारा कि गयी सर्जिकल स्ट्राइक को आप फेक बताते थे,सबुत माँगते थे। पर आज आपका अचानक फौज पर जागा भरोसा बताता है कि आप फौज की अब तक की सारी कार्यवाई के साथ खड़े हैं,और उसे सही मानते हैं।

और पुरे देश की ओर से शाबाशी दूँगा भाजपा जैसी राष्ट्रवादी पार्टी का जिसने एक पल के लिये भी यह ना सोचा कि इससे पार्टी की बदनामी होगी कार्यवाई को रोक दिया जाये। जैसे अन्य पार्टीयाँ करती है। चूँकि आपके अनुसार पुलिस , NIA, ATS सब मोदी जी की है, मोदी के कहने पर कार्य करती है, इसका मतलब यह 11 ISI के कथित जासूसों को मोदी जी ने ही पकड़वाया है। अत: ऐसे प्रधानमंत्री का शत् शत् मनन जिनके लिये देश प्रथम है, बाकी सब बाद में। इसे ही तो कहते हैं एक राष्ट्रवादी सरकार का राष्ट्रवादी प्रधानमंत्री। यह घटना सबुत है इसका।

और हाँ वह जो 11 पकड़े गये हैं, वह सब हिंदू हैं शायद। और अगर वह आरोपी साबित होते हैं तो उन्हें फाँसी पर लटकाया जाये। उनका समर्थन और बचाव करने एक भी हिंदू नहीं आयेगा। उसके अंतिम यात्रा में याकूब जैसी भीड़ नहीं दिखेगी। उनके लिये हम रात को 3 बजे न्यायालय नहीं खुलवायेंगे।
कारण हमारे लिये आतंकी सिर्फ आतंकी है।
उसका मददगार भी गद्दार है। हमारे लिये मुल्क पहले, बाकी सब बाद में।
यह फर्क है हममें और आप में,
यह फर्क बना रहना चाहीये।

और कोई सवाल?

Monday, September 19, 2016

उरी और पठानकोट विश्लेषण : भारत और पाकिस्तान

यदि सच पढ़ने सुनने की क्षमता हो तभी पढ़े,

हाल ही में उरी में आतंकी/पाकिस्तानी हमला हुआ, हमारी सेना के 18 जवान शहीद हो गए करीब 30 अस्पताल में घायल पड़े है, हम जैसो की देशभक्ति, गुस्सा और वीरता संभाले नही संभल रही, सबसे पहले तो शहीदों को श्रद्धांजलि देना चाहूंगा साथ ही इस हमले पर कुछ बात भी करना चाहूंगा हो सकता है बहुत से लोगो को हजम ना हो,

हमला कैसे हुआ : विभिन्न समाचार माध्यमो से प्राप्त जानकारी के हिसाब से हमलावर पीछे की तरफ टूटी हुई दीवार से सुबह के समय  अंदर दाखिल हुए, घूमे मुआयना किया तब हमला किया,

गलती किसकी : मुझे अपनी सेनाओं की क्षमता पर कोई शक नही है लेकिन कुछ सवाल जरूर है शायद आपके मन में भी आए हो, या हो सकता है सेना के सम्मान के कारण आप इस बारे में सोच ना पाए हो,  मारे गए चार हमलावरों में से तीन पाकिस्तानी है एयर एक भारतीय कश्मीरी, तीन घुसपैठिये पाकिस्तान से आसानी से भारत की सीमा में आते है यहाँ अपने दोस्त से मिलते है लेकिन हमारी सेना/ पुलिस/ लोकल इंटेलिजेंस सब फेल, कोई भी इन्हें पकड़ नही पाता, अब ये सेना कैम्प का मुआयना करके आते है लेकिन कैम्प की सुरक्षा में मुस्तैद जवानों को कोई खबर नही, उन्होंने "टूटी हुई दीवार" का पता लगाया हुआ और हमले की तैयारी की, यहीं एक और सवाल उठता है क्या हमारे जवानों को अपने ही कैंप की टूटी हुई दीवार नही दिखाई दी कभी, यदि दिकही दी तो क्या ये बात अधिकारियो तक पहुंची, यदि पहुंची तो अधिकारियो ने क्या दीवार बनवाने का प्रयास किया, यदि किया तो दिवार बन क्यों नही पाई, चलो कोई बात नही हो सकता है मंत्रालय ने दिवार बनाने के लिए पैसा ना दिया हो या कोई अड़चन लगा दी हो, लेकिन क्या तब तक कोई तारबंदी, अस्थाई बंकर वहां नही बनाया जा सकता था, यदि बना था तो उस पर तैनात जवान कहाँ था हमले के वक्त, तो सीधी साफ़ बात तो ये है कि हमला तो हमारी भगवान् समान पूजनीय सेना की अपनी कमियों से हुआ है लेकिन अब चुप बैठना कायरता ही है, क्या हमारी सेना/अर्धसैनिक बल अपने कैंप की भी रक्षा नही कर सकते, चलो आत्मघाती हमला था, हमारी सेना ने 17 सैनिकों की कीमत पर 4 सुवरो को मार लिया, और हाँ केवल उरी का ही नही पठानकोट में भी ये ही हुआ था लेकिन अब क्या....

सरकार ने क्या किया : हमारे मंत्री महोदय मौके पर घूम कर आए, हर छोटे बड़े नेता मंत्री ने हमले की निंदा का अपना काम पूरा किया, बड़े मंत्री साहब ने मीटिंग बुलाई चाय पी समोसे खाए, एक और रटा रटाया बयान आया हमले में पडोसी पाकिस्तान का हाथ है, दोषियों को बख्शा नही जाएगा, जनता का गुस्सा शांत होते नही दिखा एक और मीटिंग बुलाई फिर चाय समोसे इस बार मिठाई भी होगी, अब सबूत भी मिलने का दावा किया अब तो लग रहा है अब तो सबूत मिल ही गये है मीटिंग के बाद तुरंत पाकिस्तान बर्बाद हो जाएगा, सेना की कार्यवाही शुरू हो जाएगी, लेकिन होगा क्या सबूत सौंपे जाएंगे पाकिस्तानी उनका आचार डालेंगे बिरयानी में मिला कर खा जाएंगे, सबूत कम पड गये अगली बार ज्यादा भेजना का लव लैटर आएगा, सरकार कुछ नही कर रही चलो हम ही कुछ करेंगे, आओ मिलकर जोर लगा कर लिखते है पकिस्तान मुर्दाबाद, और हो जाएगा पाकिस्तान मुर्दाबाद, एक मोमबत्ती वाली फोटो डाउनलोड करके लगाते है,

तो क्या कर सकते है : तो भैया हम ये कर सकते है पर दबाव बनाओ की हमे नही चाइये 15 लाख, हमे नही चाहिए बुलेट ट्रेन, सबसे पहले हमें शांति चाहिए, शांति कैसे आएगी रोज रोज के इस नाटक से मुक्ति मिलेगी तब पड़ेगी शांति, तो भैया यदि शांति युद्ध में पाकिस्तान को बरबाद करके ही मिल सकती है तो युद्ध हो जाने दो सामने से, कम से हम हमारे जवान सोते हुए तो नही मारे जाएंगे, जब मरना ही तो तो सोते हुए मरने से अच्छा है युद्ध के मैदान में लड़ते हुए शहीद हो, कम से कम दुनिया इज्जत तो रहेगी, सर उठा कर कह तो सकेंगे की युद्ध के मैदान में लड़ते हुए शहीद हुए है, "भगवान् श्रीकृष्ण ने भी गीता में कहा है यदि शाँति का मार्ग युद्ध से होकर जाता है तो युद्ध हो जाने दो" जरुरी नही युद्ध आज और अभी हो, जैसे मीडिया कहे ऐसे हो लेकिन जरुरी है दुश्मन को सबक सिखाना, बस ध्यान रहे जो शहीद हुए है उन्होंने देश के लिए ही जान दी है तो देश का भी कुछ कर्तव्य है उनके प्रति,

क्या मिलेगा युद्ध से : मैं भी जानता हूँ युद्ध होगा तो भरी नुकसान होगा, ना जाने कितने वीर सैनिक शहीद होंगे, गाँव के गाँव बर्बाद होंगे, कई शहर भी नष्ट हो सकते है, सरकार की माली हालात खराब हो जाएगी, उद्योग ठप हो जाएंगे, लेकिन जो मिलेगा वो होगा सेना का खोया हुआ आत्मसम्मान, चिरपरिचित दुश्मन से मुक्ति, रोज रोज की तू तू मैं मैं से मुक्ति , तब हम दोबारा अपनी अर्थव्यवस्था को दोबारा खड़ा कर सकते है उद्योग चला सकते है खुद को सुरक्षित महसूस कर सकते है, हमारी सेनाओं और हथियारों को जंग लग चुका है जरूरत है उन्हें खोई हुई धार वापस लौटाने की,

तो माननीय प्रधानमंत्री प्रधानसेवक नरेंद्र मोदी जी, अब ये लव लैटर लिखना बंद किया जाए, सेना को खोया आत्मसम्मान लौटाया जाए, दुश्मन ने सोये हुए सैनिकों को घर में घुस कर मारा है अब हमारी बारी है दुश्मन को उस से घर में घुस कर मारा जाए, और हाँ यदि आपसे नही होता तो तीनों सेनाओं के सरताज राष्ट्रपति जी बैठे ही उन्हें सौंप दिया जाए राज काज, यदि उनसे भी ना होता हो तो तैयार रहो तख्तापलट के लिए, आक्रोश में कब सेनाए आदेश का इंतज़ार करना बंद कर देंगी समझ भी नही पाओगे

Wednesday, May 25, 2016

A Train Journey And Two Names To Remember

1990 की घटना..
आसाम से दो सहेलियाँ रेलवे में भर्ती हेतु गुजरात रवाना हुई। रास्ते में एक स्टेशन पर गाडी बदलकर आगे का सफ़र उन्हें तय करना था। जिस प्रकार से ठहराया उसी प्रकार से सफ़र शुरू हुआ लेकिन पहली गाड़ी में कुछ लड़को ने उनसे छेड़-छाड़ की इस वजह से अगली गाड़ी में तो कम से कम सफ़र सुखद हो यह आशा मन में रखकर भगवान से प्रार्थना करते हुए दोनों सहेलियाँ स्टेशन पर उतार गयी और भागते हुए रिजर्वेशन चार्ट तक वे पहुची और चार्ट देखने लगी। चार्ट देख दोनों परेशान और भयभीत हो गयी क्योंकि उनका रिजर्वेशन कन्फर्म नहीं हो पाया.
मायूस और न चाहते उन्होंने नज़दीक खड़े TC से गाड़ी में जगह देने के लिए विनती की TC ने भी गाड़ी आने पर कोशिश करने का आश्वासन दिया....एक दूसरे को सांत्वना देते दोनों गाड़ी का इंतज़ार करने लगी। आख़िरकार गाड़ी आ ही गयी और दोनों जैसे तैसे कर गाड़ी में एक जगह बैठ गए...अब सामने देखा तो क्या?
सामने दो नौजवान युवक बैठे थे। पिछले सफ़र में हुई बदसलूकी कैसे भूल जाती लेकिन अब वहा बैठने के अलावा कोई चारा भी नहीं था क्योंकि उस डिब्बे में कोई और जगह ख़ाली भी नहीं थी। गाडी निकल चुकी थी और दोनों की निगाहें TC को ढूंढ रही थी शायद कोई दूसरी जगह मिल जाये......कुछ समय बाद टिकिट चैक करते हुए TC वहा पहुँच गया और कहने लगा कही जगह नहीं और इस सीट का भी रिजर्वेशन अगले स्टेशन से हो चुका है कृपया आप अगले स्टेशन पर दूसरी जगह देख लीजिये। यह सुनते ही दोनों के पैरो तले जैसे जमीन ही खिसक गयी क्योंकि रात का सफ़र जो था। गाड़ी तेज़ी से आगे बढ़ने लगी। जैसे जैसे अगला स्टेशन पास आने लगा दोनों परेशान होने लगी लेकिन सामने बैठे नौजवान युवक उनकी परेशानी के साथ भय की अवस्था बड़े बारीकी से देख रहे थे जैसे अगला स्टेशन आया दोनो नौजवान उठ खड़े हो गए और चल दिये....अब दोनों लड़कियो ने उनकी जगह पकड़ ली और गाड़ी निकल पड़ी कुछ क्षणों बाद वो नौजवान वापस आये और कुछ कहे बिना नीचे सो गए।दोनों सहेलियाँ यह देख अचम्भित हो गयी और डर भी रही थी जिस प्रकार सुबह के सफ़र में हुआ उसे याद कर खुद की समेटे सहमते सो गयी....सुबह चाय वाले की आवाज़ सुन नींद खुली दोनों ने उन नौजवानों को धन्यवाद कहा तो उनमे से एक नौजवान ने कहा " बेन जी गुजरात में कुछ मदद लगी तो जरुर बताना " ...अब दोनों सहेलियों का उनके बारे में मत बदल चुका था खुद को बिना रोके एक लड़की ने अपनी बुक निकाली और उनसे अपना नाम और संपर्क लिखने को कहा...दोनों ने अपना नाम और पता बुक में लिखा और "हमारा स्टेशन आ गया है" ऐसा कह उतर गए और भीड़ में कही गुम हो गए !

दोनों सहेलियों ने उस बुक में लिखे नाम पढ़े वो नाम थे नरेंद्र मोदी और शंकर सिंग वाघेला......

यह अनुभव आया वह लेखिका फ़िलहाल General Manager of the centre for railway information system Indian railway New Delhi में कार्यरत है और यह लेख
"The Hindu "इस अंग्रेजी पेपर में पेज नं 1 पर
"A train journey and two names to remember " इस नाम से दिनांक 1 जून 2014 को प्रकाशित हुआ है... !
तो क्या आप अब भी ये सोचते है कि हमने गलत प्रधानमन्त्री चुना है??

कोई माने नहीं तो लिंक देखे http://m.thehindu.com/opinion/open-page/a-train-journey-and-two-names-to-remember/article6070562.ece